चक्रवात के चक्कर में त्राहि-त्राहि है मन घिसा पीटा हुआ लग रहा है नश्वर जीवन।। चक्रवात के चक्कर में त्राहि-त्राहि है मन घिसा पीटा हुआ लग रहा है नश्वर ...
मन मेरा शून्य में है हाँ मन मेरा शून्य में है कोई सब कुछ खोकर भी खुदा की इबादत करने ज मन मेरा शून्य में है हाँ मन मेरा शून्य में है कोई सब कुछ खोकर भी खुदा की इ...
जय, जय, जय हे माँ सरस्वती, तुमको आज निहार रहा हूँ। जय, जय, जय हे माँ सरस्वती, तुमको आज निहार रहा हूँ।
इस कविता के माध्यम से मैं मातृभूमि के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करना चाहती हूँ| इस कविता के माध्यम से मैं मातृभूमि के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करना चाहती हूँ| ...
हे प्रिय ! वियोग में तेरे रस है प्रेम का। जो सरल और सुंदर है। हे प्रिय ! वियोग में तेरे रस है प्रेम का। जो सरल और सुंदर है।
हे आंख फ़िजूल में तू नम होती है हे आंख फ़िजूल में तू आंसू खोती है! हे आंख फ़िजूल में तू नम होती है हे आंख फ़िजूल में तू आंसू खोती है!